ترانه و شعر با صدای Akdas Hayat
हौले से, धीमे से, ये पलकों में ਮਹਿੰਦੀ ਦਾ ਵੀ ਰੰਗ ਨਾ ਚੜ੍ਹਿਆ ना दस्तकें, ਚੜ੍ਹਿਆ ਸਿਰਫ਼ ਰੰਗ ਸਫ਼ੇਦੀ ਉਤਰੇ ਨਾ, ਮੈਂ ਲਈ ਰੱਖੀਆਂ (ਰੱਖੀਆਂ) सुन ले ज़रा ये
ज़रा सा तू मुस्कुरा, हौले-हौले नज़दीक आ तेरे बिन अब जिया, हाँ, जाए ना, जिनके थे वादे
वे मौला, तू उसे इस दर पे भी लाके खड़ा तो कर अब तू उसे मेरे सामने ला दे, ओ, रब्बा
और मिश्री सी तेरी बातें ये (बातें ये) किसी दिन तुझको, जानाँ, प्यार याद आएगा
इक काँच की तरह बिखरा-बिखरा हुआ, हाँ सुन ज़रा, मेरे पास आ, अब बैठे हैं हम भी यहाँ
अब तू आती है, बुलाती है, बिस्तर से यूँ गिराती है वे मौला, तेरे ही दर पर, क्या ढूँढती
अब तेरे बिना यहाँ मेरी साँसें जैसे बिना निंदिया की रातें हैं तो मेरी बातों में तू है, यादों में भी तू है
और तू ही मेरे दिल की रज़ा है तेरे बिना दिल भी ख़फ़ा है तो तू मेरे दिल की हर दुआ, सदा
बारिशें हैं, बारिशें हैं तेरी ही बातों पे मैंने सजा ली है दुनिया यहाँ दिल के दरमियाँ
वे मौला, तू उसे इस दर पे भी लाके खड़ा तो कर अब तू उसे मेरे सामने ला दे, ओ, रब्बा
तेरी आँखों का काजल ना फैले अब कभी भी तुझे इतना प्यार दूँ, आ तेरी ख़ुशियों की ख़ातिर ये दुनिया मैं मेरी इक पल में वार दूँ, मैं