ترانه و شعر با صدای Shreya Ghoshal, Jubin Nautiyal, Javed-Mohsin & Rashmi Virag
चाँद का ग़ुरूर मिट गया तू मुझे ज़मीं पे दिख गया शायरों ने हार मान ली तुझ पे मैं वो नज़्म लिख गया
एक भटके हुए क़ाफ़िए की तरह तेरे चेहरे पे मैं रुक गया
मोहब्बत का मेरी ये पहला सफ़र है ज़मीं से फ़लक चाहिए जो नींदें उड़ा दे, ना सोने दे मुझको वो मीठी तड़प चाहिए उमर-भर निभाएगी जो साथ मेरा बस एक धड़क चाहिए
मोहब्बत का मेरी ये पहला सफ़र है ज़मीं से फ़लक चाहिए उमर-भर निभाएगी जो साथ मेरा बस एक धड़क चाहिए बस एक धड़क चाहिए बस एक धड़क चाहिए
मैं कुछ भी नहीं थी, मिली जब से तुम से मुझे ज़िंदगी मिल गई तेरी रोशनी की नज़र जो पड़ी तो मेरी हर ख़ुशी खिल गई
तू मेरा क्या है, कैसे बताऊँ तुझे? मैं बस तेरी हूँ, इतना पता है मुझे
जो कभी उड़ रहा था पतंग की तरह तेरी बातों से मैं कट गया
मोहब्बत का मेरी ये पहला सफ़र है ज़मीं से फ़लक चाहिए जो नींदें उड़ा दे, ना सोने दे मुझको वो मीठी तड़प चाहिए उमर-भर निभाएगी जो साथ मेरा बस एक धड़क चाहिए
बस एक धड़क चाहिए हाँ, बस एक धड़क चाहिए
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