ترانه و شعر با صدای Justh
कल रात आया मेरे घर एक चोर आके बोला - देदे मुझे जो भी तेरा है। मैंने बोला - (Music)
मेरा नाम भी लेजा, मेरा काम भी लेजा। मेरा राम भी लेजा, मेरा श्याम भी लेजा।
मेरा नाम भी लेजा, मेरा काम भी लेजा। मेरा राम भी लेजा, मेरा श्याम भी लेजा।
कल रात आया मेरे घर एक चोर आके बोला - देदे मुझे जो भी तेरा है। मैंने बोला - (Music)
मेरी जीत भी लेजा, मेरी हार भी लेजा। मेरा डर भी लेजा, मेरा घर भी लेजा।
मेरे ख़्वाब भी लेजा, मेरे राज़ भी लेजा। मेरा ग़म भी लेजा, हर ज़ख़म भी लेजा।
मेरी ज़ात भी लेजा, औक़ात भी लेजा। मेरी बात भी लेजा, हालात भी लेजा।
लेजा मेरा, जो भी दिखे। जो ना दिखे, वो भी लेजा।
कल रात आया मेरे घर एक चोर आके बोला - देदे मुझे जो भी तेरा है। मैंने बोला - हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ
मेरा नाम भी लेजा, मेरा काम भी लेजा। मेरा राम भी लेजा, मेरा श्याम भी लेजा।
मेरी जीत भी लेजा, मेरी हार भी लेजा। मेरा डर भी लेजा, मेरा घर भी लेजा।
मेरी ज़ात भी लेजा, औक़ात भी लेजा। मेरी बात भी लेजा, हालात भी लेजा।
मेरा नाम भी लेजा, मेरा काम भी लेजा। मेरा राम भी लेजा, मेरा श्याम भी लेजा।
कर दे मुझे आज़ाद कर दे मुझे आज़ाद आज़ाद, आज़ाद। कल रात आया मेरे घर एक चोर।