ترانه و شعر با صدای Kumar Sanu & Alka Yagnik
चुरा के दिल मेरा गोरिया चली चुरा के दिल मेरा गोरिया चली उड़ा के निंदिया कहाँ तू चली पागल हुआ दीवाना हुआ पागल हुआ दीवाना हुआ कैसी ये दिल की लगी हो चुरा के दिल तेरा चली मैं चली मुझे क्या पता कहाँ मैं चली मंज़िल मेरी बस तू ही तू मंज़िल मेरी बस तू ही तू तेरी गली में चली हो चुरा के दिल मेरा गोरिया चली चुरा के दिल तेरा चली मैं चली अभी तो लगे हैं चाहतों के मेले अभी दिल मेरा धड़कनों से खेले किसी मोड़ पर मैं तुमको पुकारूं बहाना कोई बना तो ना लोगे अगर मैं बता दूं मेरे दिल में क्या है तुम मुझसे निगाहें चुरा तो ना लोगे अगर बढ़ गयी है बेताबियां कहीं मुझसे दामन छुड़ा तो ना लोगे कहता है दिल धड़कते हुए तुम सनम हमारे हम तुम्हारे हुए मंज़िल मेरी बस तू ही तू मंज़िल मेरी बस तू ही तू तेरी गली मैं चली हो चुरा के दिल मेरा गोरिया चली चुरा के दिल तेरा चली मैं चली प् प् प् पारा प् पारा प् प् प् पारा प् पारा प् प् प् पारा प् पारा ओ ओ ओ हो हो हो हो हो हो हो हो हो नही बेवफ़ा तुम ये मुझको खबर है बदलती रुतों से मगर मुझको डर है नई हसरतों की नई सेज पर तुम नया फूल कोई सजा तो ना लोगे वफ़ाएं तो मुझसे बहुत तुमने की है मगर इस जहाँ में हसीं और भी हैं कसम मेरी खा कर इतना बता दो किसी और से दिल लगा तो ना लोगे धीरे धीरे चोरी चोरीचुपके चुपकेआके मिल टूट ना जाये प्यार भरा ये दिल मंज़िल मेरी बस तू ही तू मंज़िल मेरी बस तू ही तू तेरी गली मैं चली चुरा के दिल मेरा गोरिया चली
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