ترانه و شعر با صدای Palak Muchhal
तू आता है सीने में जब जब सांसें भरती हूँ तेरे दिल की गलियों से मैं हर रोज़ गुज़रती हूँ हवा के जैसे चलता है तू मैं रेत जैसे उडती हूँ कौन तुझे यूँ प्यार करेगा जैसे मैं करती हूँ हा हा आ आ आ आ
मेरी नज़र का सफ़र तुझपे ही आके रुके कहने को बाक़ी है क्या कहना था जो कह चुके मेरी निगाहें हैं तेरी निगाहों की तुझे ख़बर क्या बेखबर मैं तुझसे ही छुप छुप कर तेरी आँखें पढ़ती हूँ कौन तुझे यूं प्यार करेगा जैसे मैं करती हूँ हा हा आ आ आ आ
तू जो मुझे आ मिला सपने हुए सरफिरे हांथों में आते नहीं उड़ते हैं लम्हे मेरे मेरी हंसी तुझसे मेरी ख़ुशी तुझसे तुझे खबर क्या बेकदर जिस दिन तुझको ना देखूं पागल पागल फिरती हूँ कौन तुझे यूँ प्यार करेगा जैसे मैं करती हूँ हा हा आ आ आ आ
آثار دیگر از Palak Muchhal