ترانه و شعر با صدای Vishal Mishra
है माँझा तेरा तेज़, ये दिल की पतंग को काटे, हाए तुझी से कट के ये गिरे तेरी छत पे आके, हाए है माँझा तेरा तेज़, ये दिल की पतंग को काटे, हाए तुझी से कट के ये गिरे तेरी छत पे आके, हाए
मेरी जान चली जाए है तू जो मुड़ के देखे, हाए तुझी से कट के ये गिरे तेरी छत पे आके, हाए है माँझा तेरा तेज़, ये दिल की पतंग को काटे, हाए
तितली थी मैं बावरी सी, इधर कभी, उधर कभी कैसे आ ठहरी तेरी छत पे आके, हाए?
मनमानियों से हैं नज़ारे, क्या दरमियाँ है ये हमारे? हो, मनमानियों से हैं नज़ारे, क्या दरमियाँ है ये हमारे?
दिल काग़ज़ का एक पंछी, तू अंबर सारा, हाए तुझे जो देखे तो ये फुर-फुर उड़ ही जाए, हाए है माँझा तेरा तेज़, ये दिल की पतंग को काटे, हाए तुझी से कट के ये गिरे तेरी छत पे आके, हाए
है माँझा तेरा तेज़, ये दिल की पतंग को काटे, हाए तुझी से कट के ये गिरे तेरी छत पे आके, हाए-हाए