ترانه و شعر با صدای KhoslaRaghu
एक पल समझने में दो पल की देरी हुई उस पल में सब हो गया (हो गया) था यारों ने कहा इश्क़ है बड़ा कमीना मैंने न की थी परवाह (परवाह) घूमे नज़ारे नज़रों के आगे मैं ठहरा रहा सुनता नहीं है ऊँची पुकारें ये दिल बहरा हुआ कोई गिन के बताए मेरी सारी ख़ताएं हैं उनकी क्या सज़ाएं ये कसर भी रह न जाए फिर तो ये आलम है के कोई भी आए जाए अब हमको न सताए जो भी होना है हो जाए हा आ, हर दिन ख़यालों में उलझा सवालों में तेरे हवाले से जाना चाहे तू क्या मगर मैं तो हूँ बेख़बर फिरता हूँ दर ब दर जाना था जुनून था नशा बेफ़िक्र था जहाँ बेकली हर घड़ी है मुझे क्या हुआ एक पल समझने में दो पल की देरी हुई हाँ उस पल में सब हो गया (हो गया) था यारों ने कहा इश्क़ है बड़ा कमीना मैंने न की थी परवाह (परवाह) घूमे नज़ारे नज़रों के आगे मैं ठहरा रहा सुनता नहीं है ऊँची पुकारें ये दिल बहरा हुआ घूमे नज़ारे (हा हा) नज़रों के आगे (हा हा) मैं ठहरा रहा (हा हा) सुनता नहीं है (हा हा) ऊँची पुकारें (हा हा) ये दिल बहरा हुआ (हा हा) घूमे नज़ारे नज़रों के आगे मैं ठहरा रहा सुनता नहीं है ऊँची पुकारें ये दिल बहरा हुआ
آثار دیگر از KhoslaRaghu