ترانه و شعر با صدای The Local Train
अब क्या कहे उनसे जनाब पिछले गुरुर टूटे नहीं थे हर घड़ी जो रूबरू अब एक शाम मुमकिन नहीं ह्म ह्म ह्म ह्म ह्म ह्म है कयामत ये मोहब्बत हारे हैं हम ना शिकवा कोई ये दास्ताँ अब मुक्तसर क्यों है खफा सुन तो सही सुनता है मेरे यार तू ही सही तो मैं दिल-ए-गुलाम सुनता है मेरे यार के मंज़िलें मिले अपना मकाम थी हसरतें जिनसे हज़ार रुखसत हुए अक्सर वही हर शिकायत अब बेअसर क्यों है खफा सुन तो सही सुनता है मेरे यार तू ही सही तो मैं दिल-ए-गुलाम सुनता है मेरे यार के मंज़िलें मिले अपना मकाम थी हसरतें जिनसे हज़ार रुखसत हुए अक्सर वही है दास्तान यह मुख़्तसर क्यों है खफा सुन तो सही ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ सुनता है मेरे यार तू है सही तुम ऐ दिल-ए-गुलाम सुनता है मेरे यार के मंज़िलें मिले अपना मकाम
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